अ सँ अः तक शब्द सँ प्रारम्भ होमय वला मैथिली फकरा

अ अक्षर सँ शुरू होमय बला मैथिली फकरा

अ अक्षर सँ शुरू होमय बला मैथिली फकरा

𑓑. 𑒁𑒿𑒑𑒳𑒩𑒲 𑒣𑒩 𑒢𑒔𑒹𑒢𑒰𑒃
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒣𑒴𑒩𑓂𑒝𑒞𑓁 𑒢𑒱𑒨𑓀𑒞𑓂𑒩𑒝 𑒧𑒹𑓀 𑒩𑒰𑒐𑒢𑒰𑒃।
1. अँगुरी पर नचेनाइ
अर्थ: पूर्णतः नियंत्रण में राखनाइ।
𑓒. 𑒁𑒑𑒞𑒹 𑒥𑒻𑒮𑒪 𑒥𑒰𑒒 𑒏𑒹𑒍 𑒢𑒻 𑒠𑒹𑒐𑒨
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒖𑒿 𑒁𑒯𑒰𑒿 𑒋𑒏𑒠𑒧 𑒬𑒰𑓀𑒞 𑒕𑒲, 𑒞 𑒏𑒼𑒢𑒼 𑒡𑒱𑒨𑒰𑒢 𑒢𑒻 𑒠𑒻𑒞 𑒁𑒕𑒱।
2. अगते बैसल बाघ केओ नै देखय
अर्थ: जँ अहाँ एकदम शांत छी, त कोनो धियान नै दैत अछि।
𑓓. 𑒁𑒢𑓂𑒯𑒩𑒼 𑒑𑒕 𑒪𑒰𑒚𑒲 𑒚𑒼𑒏𑒨
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒥𑒱𑒢𑒰 𑒖𑒰𑒢𑒏𑒰𑒩𑒲 𑒏𑒹 𑒏𑒰𑒖 𑒏𑒩𑒥।
3. अन्हरो गछ लाठी ठोकय
अर्थ: बिना जानकारी के काज करब।
𑓔. 𑒁𑒮𑒰𑒜𑓃 𑒧𑒹𑓀 𑒣𑒑𑒯𑒰 𑒏𑒰𑒙𑒥
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒁𑒮𑒧𑒨 𑒏𑒼𑒢𑒼 𑒏𑒰𑒖 𑒏𑒩𑒥।
4. असाढ़ में पगहा काटब
अर्थ: असमय कोनो काज करब।
𑓕. 𑒁𑒣𑒢 𑒂𑒿𑒐𑒱 𑒏𑒹 𑒮𑒲𑒮𑒾 𑒢𑒘𑒱 𑒠𑒹𑒐𑒨, 𑒠𑒼𑒮𑒩𑒏 𑒂𑒿𑒐𑒱 𑒏𑒹 𑒞𑒲𑒪𑒼 𑒠𑒹𑒐𑒨
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒁𑒣𑒢 𑒠𑒼𑒭 𑒢𑒻 𑒠𑒹𑒐𑒥, 𑒧𑒳𑒠𑒰 𑒂𑒢𑒏 𑒕𑒼𑒙𑒼 𑒑𑒪𑒞𑒲 𑒠𑒹𑒐𑒥।
5. अपन आँखि के सीसौ नञि देखय, दोसरक आँखि के तीलो देखय
अर्थ: अपन दोष नै देखब, मुदा आनक छोटो गलती देखब।
𑓖. 𑒁𑒢𑓂𑒢 𑒥𑒱𑒢𑒰 𑒧𑒢𑓂𑒢 𑒢𑒻
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒥𑒱𑒢𑒰 𑒦𑒼𑒖𑒢 𑒏𑒹 𑒏𑒰𑒖 𑒢𑒻 𑒯𑒼𑒃 𑒕𑒻।
6. अन्न बिना मन्न नै
अर्थ: बिना भोजन के काज नै होइ छै।
𑓗. 𑒁𑒕𑒱 𑒞 𑒥𑒰𑒖𑒹, 𑒢𑒻 𑒞 𑒩𑒰𑒖𑒹
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒖𑒿 𑒁𑒯𑒰𑒿 𑒏𑒱𑒕𑒳 𑒏𑒩𑒻𑒞 𑒕𑒲 𑒞 𑒔𑒩𑓂𑒔𑒰 𑒯𑒼𑒃𑒕, 𑒢𑒻 𑒞 𑒏𑒼𑒢𑒼 𑒧𑒞𑒪𑒥 𑒢𑒻।
7. अछि त बाजे, नै त राजे
अर्थ: जँ अहाँ किछु करैत छी त चर्चा होइछ, नै त कोनो मतलब नै।
𑓘. 𑒁𑒡𑒱𑒏 𑒧𑒱𑒩𑒔𑒰𑒃 𑒮𑒹 𑒗𑒼𑒣𑒛𑓃𑒲 𑒖𑒩𑒻
𑒁𑒩𑓂𑒟: 𑒖𑒩𑒴𑒩𑒞 𑒮𑒿 𑒥𑒹𑒮𑒲 𑒏𑒰𑒖 𑒏𑒹 𑒢𑒳𑒏𑒮𑒰𑒢 𑒯𑒼𑒃𑒞 𑒕।
8. अधिक मिरचाइ से झोपड़ी जरै
अर्थ: जरूरत सँ बेसी काज के नुकसान होइत छ।
9. अट्टा लीलनाइ
अर्थ: चोरी-छिपे कोनो चीज लेल जाइत।
10. अपन ढोल अपन हाथे बजेनाइ
अर्थ: अपन बड़ाई अपने करब।
11. अन्हर चढ़ल काठ पर, नञि ने देखय नञि ने बूझय
अर्थ: अनाड़ी व्यक्ति के कठिन परिस्थिति में पड़ि जाए।
12. असमय के फूल, जल्दी झरै
अर्थ: समय सँ पहिने सफलता स्थायी नै होइत।
13. अक्कल के दुश्मन, आफत के साथी
अर्थ: मूर्ख व्यक्ति हमेशा मुसीबत मंगैत रहैत अछि।
14. अगिला डाढ़ि छोड़ि, पाछाँ झूलनाइ
अर्थ: बेकार चीज के लेल आवश्यक चीज के छोड़ि देनाइ।
15. अपन पेट काटि आन के भोज करेनाइ
अर्थ: अपन हानि कऽ आन के लाभ पहुँचेनाइ।
16. अपन घर में कुकुरो शेर होइ छै
अर्थ: अपन क्षेत्र में लोक बहादुर बुझैत अछि।
17. अइसन कौआ जकरा गाछो नै बिसरै
अर्थ: बड़का संकट में सब अपनहि छोड़ि दैत अछि।
18. अन्हर हाथे लाठी
अर्थ: बेसहारा लोक के सहारा भेटल।
19. अपन जाड़ि में मिरचाइ नै त कोन घर में दान?
अर्थ: जे स्वयं सक्षम नै, ओ आन के मदद की करत?
20. अक्कल हुअय त दू टा पर्याप्त
अर्थ: बुद्धि हुअय त कम संसाधन में काज चलै।
21. अखरोट के देखि दाँत गड़ेनाइ
अर्थ: बिना बुझने कोनो काज शुरू कऽ देब।
22. अपन खेत में हरियरी नै, त आन के की देब?
अर्थ: जे स्वयं सक्षम नै, ओ आन के मदद की करत?
23. अँखफूटल बेंग के बरसाते सुखद
अर्थ: जकरा बुझाइत नै, ओ समय के महत्व नै जानै।
24. अन्हरा घर में आइना रखब
अर्थ: बेकामक वस्तु के उपयोग करबाक प्रयास।
25. अइहें त खइहें, नै त नाइहें
अर्थ: जँ काज करब त लाभ भेटत, नै त बेकार रहब।
26. अप्पन मुँह मिठ्ठू बनब
अर्थ: अपनहि अपन बड़ाई करब।
27. अइहें तँ बाजब, नै त चुप रहब
अर्थ: जिनका ज्ञान छै ओहेँ बाजत।
28. अनाड़ी के घोड़ो लँगड़ाइत छै
अर्थ: जकरा नै अबैत छै ओ साधन के दोष देत।
29. अनकर भाड़ा में बनलो सत्तू
अर्थ: आनक चीज पर मौज करब।
30. अक्कल छेकाएल छै
अर्थ: कोनो व्यक्ति बेकार भऽ गेल।
31. असाढ़ में बहनोइयो फूस
अर्थ: कठिन समय में केओ नीक नै लगै।
32. अकास फाटत कि लाठी गड़त
अर्थ: कोनो असंभव चीज के उम्मीद करब।
33. अगहन में कोनो गाछी सुखाय छै?
अर्थ: जे चीज स्वाभाविक नै, ताहि पर प्रश्न नै उठब।
34. अनकर हाथे मूस मरब
अर्थ: अपन काज आनसँ करब।
35. अकल बिका रहल छै, मूर्ख किनै नै
अर्थ: बुधियार लोकक बात मूर्ख नै सुनैत।
36. अपन चून बचा कऽ चलू
अर्थ: अपन चीज सहेजि कऽ राखू।
37. अन्न खइले से सुतले पर कर्ज रहै
अर्थ: जे कोनो उपकार पाबि चुकैत नै, ओ कर्जदार होइत अछि।
38. अनकर धन पर दाना नै
अर्थ: पराय धन पर लोभ नै करब।
39. अप्पन में सुग्गा, आन में कौआ
अर्थ: अपन चीज नीक बुझै आ आन के खराब।
40. अहीं के मुरगी अहीं के अंडा
अर्थ: अपनहि चीज फेर दोसर के बुझाइत।
41. अनपढ़ के कंठस्थ रामायण
अर्थ: जकरा कोनो ज्ञान नै, ओ फिजूल बात करैत रहै।
42. अँगना में बैसल कुकुरो गुर्राइत छै
अर्थ: कमजोर के सब कमजोर बुझै।
43. अन्न आ जल नै, त कल्याण नै
अर्थ: बिना भोजन-जल के काज संभव नै।
44. अंधा के हाथ लाठी
अर्थ: कोनो बेसहारा के सहारा भेटल।
45. अगुआ बैसल, पछुआ चटकल
अर्थ: जे आगाँ बढ़ल, ओ पार लागल।
46. अन्हरा के मसीहा नै देखाय
अर्थ: जिनका जरूरत नै, ओ मदद नै देखैत।
47. अनकर पानि पर गागरो नै चढ़ै
अर्थ: आनक सहारे काज नै होइ।
48. अप्पन बकरी सभ केँ शेर बुझै
अर्थ: अपन चीज के सब सँ नीक बुझै।
49. अहीं के खेत, अहीं के मचान
अर्थ: सब किछु अपनहि, फेरो शिकायत।
50. अनकर धन पर भोज खेनाइ
अर्थ: पराय चीज पर मजा उठेनाइ।
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